अहम ऐलान
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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: खड़े होकर वुज़ू करना कैसा ?

तारीख़: मंगलवार, जून 09, 2026


 अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू

सवाल: क्या फ़रमाते हैं उलेमा-ए-किराम व मुफ़्तियान-ए-इज़ाम इस मसअले के बारे में कि खड़े होकर वुज़ू बनाना कैसा है? इस पर जवाब इनायत फ़रमाएँ। ऐन नवाज़िश होगी। फ़क़त वस्सलाम

अल-मुस्तफ़्ती: मुहम्मद शाकिर रज़ा रज़वी, बिंदकी, फ़तेहपुर (यू.पी.)

वअलैकुमुस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू

अल-जवाब बिऔनिल मलिकिल वह्हाब

वुज़ू खड़े होकर करना भी जायज़ है शरीअत ने इसकी मनाही नहीं फ़रमाई। लेकिन बैठकर वुज़ू करना अफ़ज़ल और सुन्नत के ज़्यादा क़रीब है क्योंकि हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ का मामूल ज़्यादातर बैठकर वुज़ू फ़रमाना था।

लिहाज़ा अगर कोई खड़े होकर वुज़ू करे तो वुज़ू हो जाएगा और कोई गुनाह नहीं होगा मगर अदब और सुन्नत यही है कि बैठकर वुज़ू किया जाए ताकि ख़ुशूअ व ख़ुज़ूअ बरक़रार रहे

हदीस शरीफ़ में है कि हज़रत उस्मान ग़नी रज़ियल्लाहु अन्हु ने बैठकर वुज़ू फ़रमाया और कहा मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को इसी तरह वुज़ू करते देखा है

(सहीह मुस्लिम)

फ़ुक़हा-ए-किराम लिखते हैं:

الجلوس في الوضوء أفضل

तर्जुमा: वुज़ू बैठकर करना अफ़ज़ल है (फ़तावा आलमगीरी किताबुत्तहारत)

ख़ुलासा-ए-कलाम यह है कि खड़े होकर वुज़ू करना दुरुस्त है, बशर्ते कि वुज़ू का पानी या छींटे ऊपर न आएँ। और अगर छींटे ऊपर आ भी रहे हों तो वुज़ू हो जाएगा, मगर यह ख़िलाफ़-ए-अदब है और मकरूह है फ़क़त वस्सलाम

वल्लाहु अअलमु बिस्सवाब

कत्बा अल-अब्द ख़ाकसार नाचीज़ मुहम्मद शफ़ीक़ रज़ा रज़वी ख़तीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हज़रत मंसूर शाह रहमतुल्लाहि अलैहि बस स्टॉप कुशनपुर फ़तेहपुर अल-हिन्द

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