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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: क्या मुतकिफ़ को कुरआन की तिलावत करना जरूरी है?

तारीख़: गुरुवार, मार्च 12, 2026


 सवाल:

क्या इ‘तिकाफ़ की हालत में क़ुरआन की तिलावत करना जरूरी है?

अल-जवाब बि औनिल मलिकिल वह्हाब:

इ‘तिकाफ़ की हालत में क़ुरआन की तिलावत करना जरूरी नहीं है, लेकिन यह बहुत बड़ा और अफज़ल अमल है। क्योंकि इ‘तिकाफ़ का मकसद ही यह है कि इंसान अपना ज्यादा समय इबादत में गुज़ारे

इसलिए इ‘तिकाफ़ करने वाले को चाहिए कि वह ज्यादा से ज्यादा क़ुरआन शरीफ पढ़े, तस्बीह पढ़े, नफ्ल नमाज़ अदा करे और अल्लाह तआला से दुआ करता रहे

अगर कोई व्यक्ति तिलावत के अलावा दूसरे नेक कामों में लगा रहे जैसे दीन की किताबें पढ़ना, दुआ करना या ज़िक्र करना, तो यह भी अच्छा अमल है

इस तरह इ‘तिकाफ़ में तिलावत जरूरी तो नहीं लेकिन बहुत ज्यादा फज़ीलत वाला काम है और इसका ज्यादा से ज्यादा एहतिमाम करना चाहिए

हवाला:फ़तावा हिंदिया रद्दुल मुख्तार 

वल्लाहु तआला आ'लमु बिस्सवाब

कत्बा अल अब्द खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी खतीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हजरत मन्सूर शाह रहमातुल्ला अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेश 

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