क्या रोज़े की हालत में नहाना या सिर पर पानी डालना जायज़ है?
अल-जवाब बि औनिल मलिकिल वह्हाब:
रोज़े की हालत में नहाना बिल्कुल जायज़ है और इससे रोज़े पर कोई असर नहीं पड़ता। अगर किसी को गर्मी की वजह से तकलीफ हो या बदन पर पसीना ज्यादा आ गया हो तो वह नहा सकता है या शरीर पर पानी डाल सकता है। यह सब काम रोज़े को नहीं तोड़ते
हदीस शरीफ में भी इसका जिक्र मिलता है कि सहाबा-ए-किराम गर्मी की वजह से रोज़े की हालत में अपने सिर पर पानी डाल लेते थे इससे मालूम हुआ कि शरीर को ठंडक पहुँचाने के लिए ऐसा करना मना नहीं है
हाँ, नहाते वक्त रोज़ेदार को यह ध्यान रखना चाहिए कि पानी गलती से भी मुँह या नाक के रास्ते अंदर न चला जाए। अगर पानी जानबूझकर हलक से नीचे चला गया तो रोज़ा टूट सकता है। इसलिए कुल्ली करते वक्त या नाक में पानी डालते वक्त एहतियात जरूरी है
इस तरह रोज़े की हालत में सफाई और नहाने की इजाज़त है, मगर रोज़े के अदब और एहतियात को भी ध्यान में रखना चाहिए
हवाला:फ़तावा हिंदिया، किताबुस्सौम
वल्लाहु तआला आ'लमु बिस्सवाब
कत्बा अल अब्द खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी खतीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हजरत मन्सूर शाह रहमातुल्ला अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेश
