अहम ऐलान
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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: उजरत लेकर कुरान पढ़ना कैसा

तारीख़: बुधवार, मई 03, 2023


सवाल कुछ लोग कहते हैं कि तालीमे क़ुरआन पर उजरत लेना हराम है क्या यह सही है

अल जवाब यह हुक्म पहले था लेकिन इस दौर में तालीमे क़ुरआन पर उजरत लेना नाजाइज़ व हराम नहीं बल्कि जाइज़ है

फ़तावा क़ाज़ी ख़ान में है

واما الذي اخذا المعلم، قالوا لاباس للمعلم ان ياخذ لاجرة على تعليم القران فى هذالزمان

यानी फ़ी ज़माना मुअल्लिम व मुदर्रिस जो तालीमे क़ुरआन पर उजरत लेते हैं उसमें कोई हर्ज नहीं बेशक जाइज़ है, जो लोग नाजाइज़ व हराम कह रहे हैं, वह दर'हक़ीक़त मसाइले शरईयह व फ़िक़्हियह से ना वाक़िफ़ हैं

अगर ऐसा हो जाए तो तालीमे क़ुरआन का बहुत बड़ा फ़क़दान होगा, क्योंकि आज के दौर में बग़ैर रुपया पैसा के कोई काम करना और करवाना बहुत ही मुश्किल है

हर आदमी को उसकी ज़रूरत है कोई भी बेकार में अपना टाइम नहीं दे सकता इसी बिना पर उल्मा व फ़ुक़हा व मुताख़्ख़िरीन ने दौरे हाज़िर में तालीमे क़ुरआन पर उजरत लेने को जाइज़ फ़रमाया

📚 फ़तावा क़ाज़ी ख़ान जिल्द 3, सफ़ह 101, किताबुल हज़र वल इबाहत)

📔 औरतों के जदीद और अहम मसाइल सफ़ह.130)

कत्बा अल अब्द खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी ख़तीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हज़रत मन्सूर शाह रहमतुल्लाह अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जि़ला फतेहपुर उत्तर प्रदेश

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