क़ब्रिस्तान में स्प्रे यानी दवा छिड़कना कैसा है


क़ब्रिस्तान में स्प्रे यानी दवा छिड़कना कैसा है


सवाल क्या फ़रमाते हैं उलमा-ए-किराम व मुफ़्तियान-ए-इज़ाम इस मसअले में कि क़ब्रिस्तान में स्प्रे यानी दवा छिड़कना घास जलाने के लिए कैसा है ? हवाले के साथ जवाब इनायत फ़रमा कर अन्दल्लाह माजूर होंगे।

साइल: मोहम्मद काशिफ़ रज़वी, पीलीभीत

अल-जवाब (बऔनिल मलिक अल-वह्हाब)

बिला वजह क़ब्रिस्तान की हरी (तर) घास ख़त्म करने के लिए क़ब्रिस्तान में दवा वग़ैरह डालना जायज़ नहीं।

ताजदार-ए-अहले-सुन्नत फ़ाज़िल-ए-बरेलवी रज़ीअल्लाहु तआला अन्हु तहरीर फ़रमाते हैं कि:

क़ब्रिस्तान में जो घास उगती है, जब तक सब्ज़ यानी हरी है, उसे काटने की इजाज़त नहीं। जब सूख जाए तो काट कर जानवरों के लिए भी भेज सकते हैं

(फ़तावा रज़विया, जिल्द 6, सफ़्हा 492)

क़ब्र पर से हरी घास नोचना नहीं चाहिए, क्योंकि उसकी तस्बीह से रहमत उतरती है और मय्यत को उन्स होता है।

(रद्दुल मुहतार, जिल्द 3, सफ़्हा 183)

फ़क़ीह-ए-आज़म-ए-हिन्द हुज़ूर सदरुश्शरिया अल्लामा मुफ़्ती अमजद अली आज़मी अलैहिर्रहमा तहरीर फ़रमाते हैं कि: क़ब्रिस्तान से हरा दरख़्त काटना मकरूह है, और जब दरख़्त सूख जाए तो काटने में हरज नहीं

(फ़तावा अमजदिया, जिल्द 4, सफ़्हा 192) (माख़ूज़ अज़: ज़िया-ए-शरीअत, जिल्द अव्वल, सफ़्हा 167)

हाँ, अगर घास इस तरह हो कि ज़ाइरीन को आने-जाने में दिक़्क़त हो, या आने-जाने वालों को तकलीफ़ होती हो, या मूज़ी जानवरों की वजह से नुक़सान पहुँचने का ग़ालिब गुमान हो, तो ऐसी सूरत में ख़ास क़ब्रों को छोड़कर बाक़ी जगहों पर दवा छिड़क सकते हैं।

वअल्लाहु आलम बिस्सवाब

कतबा: फ़क़ीर मोहम्मद महबूब आलम अमजदी मक़ाम: आज़ाद नगर, निचलौल ज़िला: महराजगंज, यू.पी., अल-हिन्द

एक टिप्पणी भेजें