मेंहदी न लगाने वाली औरत के बारे में क्या हुक्म है

 


सवाल क्या हदीस में मेंहदी न लगाने वाली औरत के बारे में यह है कि गोया दरिंदों का हाथ है या मर्दानी औरत का हाथ

अल जवाल- जी हां हदीस से यह साबित है कि मेंहदी से अपने हाथों को ना रंगने वाली औरतों को आक़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि तुम्हारे हाथ गोया दरिंदों के हाथ हैं या मर्दानी औरत के हाथ हैं

पहली बात यह है कि औरतों को मेंहदी लगाना मुस्तहब व मुस्तहसन है और मर्दों से इम्तियाज़ भी है इसलिए के मर्द तो अपने हाथ रंगते नहीं इसलिए औरत भी अगर अपने हाथों को ना रंगेगी तो मुर्दों से तश्ब्बोह हो जाएगा

हदीसे पाक में है हज़रते आयशा सिद्दीक़ा रज़िअल्लाहू तआला अन्हा से रिवायत है कि

हिंद बिन्ते उत्बा ने अर्ज़ की या नबीअल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मुझे बैयत कर लीजिए तो आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि

मैं तुझे बैयत न करूंगा जब तक तू अपनी हथेलियों को बदल ना दे (यानी मेंहदी लगाकर उनका रंग बदल ना दे) तेरे हाथ गोया दरिंदा के हाथ मालूम हो रहे हैं

📚 अबू दाऊद, जिल्द 4, सफ़ह 103)

और दूसरी हदीस में है हज़रते आयशा सिद्दीक़ा रज़िअल्लाहू तआला अन्हा रिवायत करती हैं कि

एक औरत के हाथ में किताब थी, उसने पर्दा के पीछे से रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की तरफ़ इशारा किया यानी हुज़ूर (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) को देना चाहा, तो आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपना हाथ खींच लिया और यह फ़रमाया कि

मालूम नहीं मर्द का हाथ है या औरत का हाथ है उसने कहा कि औरत का हाथ है तो आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि

अगर औरत होती तो नाख़ूनों को मेंहदी से रंगे होती

📚 अबू दाऊद जिल्द 4 सफ़ह 104)

अल इन्तिबाह

मालूम हुआ कि औरतों को चाहिए अपने हाथों को मेंहदी वग़ैरह से रंगीन कर लिया करें ताकि मर्दों से मुशाबहत न रहे आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का बैयत न फ़रमाना और अपने हाथों को खींच लेना इस बात पर दाल (सुबूत) है कि औरत के हाथ का रंगा होना बे रंगे हुए हाथ से कहीं ज्यादा बेहतर है

📔 औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 56--57--58)

कत्बा अल अब्द खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी ख़तीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हज़रत मन्सूर शाह रहमतुल्लाह अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जि़ला फतेहपुर उत्तर प्रदेश

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