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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: दिवाली की मुबारकबाद देना और दिवाली की मिठाई

तारीख़: रविवार, अक्टूबर 23, 2022

 

होली दिवाली बद मज़हबों के त्योहारों पर हिंदुओं को मुबारकबाद देना सख़्त हराम और कुफ़्र की तरफ़ ले जाने वाला काम है

अगर अपनी खुशी से मुबारकबाद दे या शरीक हो या उनके इस काम को अच्छा समझे। तो ऐसा करने वाला काफ़िर होगा उस पर तोबा तज्दीद ए ईमान तज्दीद ए निकाह ज़रूरी है

अगर मजबूरी में ऐसा करना पड़े ना करने पर जान जाने का ख़तरा हो या नौकरी वगैरह की वजह से ऐसा करना पड़ता है फिर भी ऐसा करना सख़्त हराम है बचना निहायत ज़रूरी है

मुसलमान को होली दिवाली के इश्तिहार पोस्टर वगैरा छापना यह सब भी हराम है। और उसका पैसा लेना भी हराम और गुनाह है

हिंदुओं के त्यौहार की मिठाई उनके त्यौहार के दिन लेना जाइज़ नहीं है। कि यह एक तरीके से उसमें शरीक होना माना जाएगा। किसी और दिन ले सकते हैं

(फ़तावा शारेह् बुखारी ज़िल्द 02 सफ्ह नंबर 565\566\597\598)

और अल मलफूज़ात मे है कि उस दिन ना ले हाँ अगर दूसरे दिन दे तो ले ले मगर ये समझ कर ना ले कि उनके त्योहार की मिठाई है बल्कि माले मूज़ी नसीबे गाज़ी समझे 

📕अल मलफूज़ात हिस्सा 1 सफ़ह 93

अज़ क़लम 🌹 खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रज़ा रिज़वी खतीब व इमाम (सुन्नी मस्जिद हज़रत मनसूर शाह रहमतुल्लाह अलैह बस स्टॉप किशनपुर अल हिंद)

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