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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: औलाद को जायेदाद से बे दखल करना कैसा ❓

तारीख़: शनिवार, अगस्त 27, 2022

औलाद को जायेदाद से बे दखल करना कैसा ❓

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बाज़ लोग अपनी औलाद के बारे में यह कह देते हैं कि मैंने इसको आक कर दिया और उसका मतलब यह ख्याल किया जाता है कि अब वह आक की हुई औलाद बाप के मरने के बाद इसकी मीरास से हिस्सा नहीं पाएगी हालांकि यह एक बेकार बात है और आक कर देना शरअन कोई चीज़ नहीं है और न बाप के यह लफ्ज़ बोलने से उसकी औलाद जाएदाद में हिस्से से महरूम होगी बल्कि वह बदस्तूर बाप की मौत के बाद उसके तरके में शरई हिस्से की हक़दार है हाँ माँ बाप की नाफरमानी और उनको ईज़ा देना बड़ा गुनाह है और जिसके वालिदैन उससे नाखुश हों वह दोनों जहाँ में इताब व अज़ाबे इलाही का हकदार है और सख़्त महरूम हैं 

सय्यिदी आलाहज़रत रदियल्लाहु तआला अन्हु इरशाद फ़रमाते हैं आक कर देना शरअन कोई चीज़ नहीं न उससे विलायत जाइल हो

📚 (फतावा रज़विया  जिल्द ५  सफ़हा ४१२)

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.136)

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✍🏻 अज़ क़लम 🌹 खाकसार ना चीज़ मोहम्मद शफीक़ रज़ा रिज़वी खतीब व इमाम (सुन्नी मस्जिद हज़रत मनसूर शाह रहमतुल्लाह अलैह बस स्टॉप किशनपुर अल हिंद)

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