सज्दा तिलावत कब करना चाहिए

सज्दा तिलावत कब करना चाहिए 



 ✿➺ सुवाल


क्या हमें कुरआन के सजदे तुरंत करने चाहिए और इसकी नियत कैसे मुकम्मल होगी?


❀➺ जवाब


कुरआनी आयात के सजदे (नमाज़ मे) फौरन करना वाजिब है, मगर नमाज़ के बाहर फौरन वाजिब नही और, इसी तरह उस आयत को पढ़ने वाले के साथ साथ सुनने वाले पर भी सजदा करना वाजिब होता है, और ये भी देखा जाता है की क़ुरआन कोई पढ़ता है और सजदे किसी और से करवाता है ये भी ग़लत है, यानी कुरआन पूरा करके जिससे बख़्शवाते हैं, उसी से सजदे करवाते हैं, ये तरीक़ा सही नहीं है


बहारे शरीअत जिल्द: 1, सफा: 733 पर है


आयते सजदा नमाज़ के बाहर पढ़ी तो फोरन सजदा कर लेना वाजिब नही, हाँ बेहतर है" और ये ज़रूरी नही की आयत को अरबी मे ही पढ़ा जाए बल्कि उसका तर्जुमा भी पढ़ा या सुना तो भी सजदा वाजिब होता है जैसा की

बहारे शरीअत जिल्द: 1, सफा: 730 पर है


फ़ारसी या किसी और जुबान मे आयत का तर्जुमा पढ़ा तो पढ़ने वाले और सुनने वाले पर सजदा वाजिब हो गया, चाहै सुनने वाले ने ये समझा हो या ना समझा हो की ये आयते सजदा का तर्जुमा है. अलबत्ता ये ज़रूरी है की उसे नामालूम हो और बता दिया गया हो की ये आयते सजदा का तर्जुमा है सजदे की नियत ये करना ज़रूरी नही की फूला आयत का सजदा कर रहा हूँ, बस दिल मे सजदे की नियत काफ़ी है


📚दुरै मुख़्तार जिल्द: 2, सफा : 499 पर है


इसकी नियत मे ये शर्त नही की फूला आयत का सजदा कर रहा हू, बल्कि मुतलक़ान सजदा ए तिलावत की नियत काफ़ी है 

आयते सजदा का तरीक़ा ये है की जब सजदे की आयत पढ़े तो फोरन कुरआन साइड मे रख कर सजदे कर ले, यानी बैठे बैठे भी हो सकता है, सिर्फ सजदा करना काफ़ी है सजदे की तसबीह ना भी पढ़ी तो भी हर्ज़ नही और बेहतर ये है की खड़े हो कर, अल्लाहु अकबर कहते हुए सजदे मे जाए और 3 बार सजदे की तसबीह पढ़े, फिर खड़ा हो, ये सुन्नत है जैसा की```

फतावा आलमगीरी जिल्द: 1, सफा: 130 पर है

सजदे का सुन्नत तरीका यह है की खड़े हो कर “अल्लाहु अकबर" कहता हुए सजदे मे जाए और कम से कम 3 बार (सजदे की तसबीह कहै) फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़ा हो जाए, अव्वल आखिर अल्लाहु अकबर कहना सुन्नत है और खड़े हो कर सजदे मे जाना और फिर खड़े होना मुस्तहब है

तनवीरुल अबसार जिल्द: 2, सफ़ा: 700 पर है


सजदा ए तिलावत के लिए अल्लाहु अकबर कहते वक़्त ना हाथ उठाना है ना उसमे तशाहुद है ना सलाम


ह़वाला पर्दादारी, सफा नं.20


✒️मौलाना अब्दुल लतीफ न‌ईमी रज़वी क़ादरी बड़ा रहुवा बायसी पूर्णियाँ बिहार 

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