(सवाल) अगर बकरी ने बचपन में गलती से कुतिया (मादा कुत्ते) का दूध पी लिया हो, तो क्या उस बकरी का गोश्त खाना जायज़ है या हराम? इस बारे में शरई हुक्म बताया जाए।
(जवाब) उस बकरी का गोश्त खाना जायज़ है। अगर उसने हाल ही में दूध पिया हो या अभी भी पी रही हो, तब भी हल्की कराहत (नापसंदगी) के साथ उसका गोश्त जायज़ ही होता है।
फ़तावा रज़विया में है: अगर वह (बकरी) इतनी बड़ी हो गई कि दूध छूटे कुछ मुद्दत गुजर चुकी हो, तो इत्तिफ़ाक़ से बिना कराहत हलाल है।
इसी तरह, अगर दूध पीने वाली बकरी को कुछ दिनों के लिए उस (हराम जानवर के) दूध से अलग रखकर हलाल जानवर का दूध या चारा दिया जाए, और उसके बाद ज़बह किया जाए, तो भी इत्तिफ़ाक़ से बिना कराहत हलाल है।
और अगर उसी हालत में ज़बह कर लिया, तो उसका गोश्त मकरूह है।
इस सूरत में कराहत होने में कोई इख़्तिलाफ़ नहीं है, हाँ इसमें इख़्तिलाफ़ है कि यह कराहत तनज़ीही है (यानी खाना बेहतर नहीं, मगर खा ले तो गुनाह नहीं) या तहरीमी है (यानी खाना नाजायज़ और गुनाह)।
आम किताबों में, जैसे नवाज़िल, ख़ुलासा ख़ानिया ज़खीरा बज़ाज़िया तबयीनुल हक़ाइक़, तकमिलतुल लिसान अल-हुक्काम (अल्लामा इब्राहीम हलबी), दुर्र-ए-मुख़्तार वग़ैरह में पहले क़ौल (कराहत तनज़ीही) को ही मुअतबर ठहराया गया है।
और ख़ुद इमाम मुहम्मद रहमतुल्लाह अलैह से इस पर साफ़ नसी बयान हुई है और इसमें शक नहीं कि दलील के लिहाज़ से वही ज़्यादा मज़बूत है (फ़तावा रज़विया, जिल्द 20, सफ़्हा 256)
वअल्लाहु तआला आलम
कतबा:नदीम इब्न अलीम अल-मसबूर अल-ऐनी
