जुमा का बयान !?



सवाल जुमा की नमाज़ फ़र्ज़ है या वाजिब

जवाब जुमा की नमाज़ फ़र्ज़ है और उसकी फ़र्ज़ियत ज़ोहर से ज़्यादा मुअक्किद है

सवाल जुमा फ़र्ज़ होने की कितनी शर्तें हैं

जवाब जुमा फ़र्ज़ होने की मुन्दरजा ज़ैल ग्यारह (11) शर्तें हैं 
नंबर-(1)
और नंबर (2)
शहर में मुक़ीम और आज़ाद होना लिहाज़ा मुसाफ़िर और ग़ुलाम पर जुमा फ़र्ज़ नहीं

नंबर (3)
सेहत यानी ऐसे मरीज़ पर कि जामे मस्जिद न जा सके जुमा फ़र्ज़ नहीं

नंबर (4)
नंबर (5)
नंबर (6)
मर्द होना और आक़िल होना बालिग़ होना यानी औरत, मजनून और नाबालिग पर जुमा फ़र्ज़ नहीं

नंबर (7)
नंबर (8)
अंख़ियार होना और चलने पर क़ादिर होना लिहाज़ा अंधे
लुंजे
और ऐसे फ़ालिज वाले पर कि जो मस्जिद तक न जा सकता हो जुमा फ़र्ज़ नहीं
नंबर (9)
क़ैद में न होना मगर जब्के किसी (क़र्ज़) दैन की वजह से क़ैद किया गया हो और अदा करने पर क़ादिर हो तो फ़र्ज़ है
नंबर (10)
हाकिम या चोर वग़ैरह किसी ज़ालिम का ख़ौफ़ न होना,
नंबर (11)
बारिश या आंधी वग़ैरह का इस क़दर न होना कि जिससे नुक़सान का क़वी अन्देशा हो 📚 आलम गीरी 📚 दुर्रेमुख़्तार 📚 रद्दुलमौहतार 📚 बहारे शरीअत

सवाल जिन लोगों पर जुमा फ़र्ज़ नहीं है अगर वो लोग जुमा में शरीक हो जाएं तो उनकी नमाज़ हो जाएगी या नहीं,

जवाब हो जाएगी यानी ज़ोहर की नमाज़ उनके ज़िम्मा से साक़ित हो जाएगी

सवाल जुमा जाइज़ होने के लिए कितनी शर्तें हैं

जवाब जुमा जाइज़ होने के लिए छः (6) शर्तें हैं कि उनमें से अगर एक भी नहीं पाई गई तो जुमा होगा ही नहीं

सवाल जुमा जाइज़ होने की पहली शर्त क्या है

जवाब जुमा जाइज़ होने की पहली शर्त मिस्र(शहर)या फिनाए मिस्र होना है

सवाल मिस्र और फिनाए मिस्र किसे कहते हैं

जवाब मिस्र वो जगह है कि जिसमें मुतअद्दिद कूचे और बाज़ार हों और वो ज़िला या तहसील हो कि उसके मुतअल्लिक देहात गिने जाते हों और मिस्र के आस पास की जगह जो मिस्र की मसलेहतों के लिए हो उसे फिनाए मिस्र कहते हैं जैसे स्टेशन और क़ब्रिस्तान वग़ैरह 📗 ग़ुनियातुत्तालिबीन 📚 फ़तावा रज़वियह 📚 बहारे शरीअत

सवाल क्या गांव में जुमा की नमाज़ पढ़ना जाइज़ नहीं है

जवाब नहीं गांव में जुमा की नमाज़ पढ़ना जाइज़ नहीं लेकिन जहां क़ायम हो बंद न किया जाए कि आवाम जिस तरह भी अल्लाह व रसूल का नाम ले ग़नीमत है 📚 फ़तावा रज़वियह, शरीफ़

सवाल गांव में जुमा की नमाज़ पढ़ने से उस दिन की ज़ोहर नमाज़ साक़ित होती है या नहीं

जवाब नहीं गांव में जुमा की नमाज़ पढ़ने से उस दिन की ज़ोहर नमाज़ नहीं साक़ित होती 📚 फ़तावा रज़वियह 📚 बहारे शरीअत

सवाल कुछ लोग गांव में जुमा पढ़ने के बाद चार रकअत ऐहतियातुज़्ज़ोहर पढ़ते हैं क्या ये सही है

जवाब नहीं बल्के गांव में इसके बजाए चार रकअत ज़ोहर फ़र्ज़ पढ़ना ज़रूरी है अगर नहीं पढ़ेगा तो गुनाहगार होगा 📚 फ़तावा रज़वियह शरीफ़ 📗 अनवारे शरीअत उर्दू सफ़ह 87/88/89)

इन्शा अल्लाहुर्रहमान
इस बयान के बाक़ी मसाइल आने वाली क़िस्त 46 में मुलाहिज़ा फ़रमाईयेगा

कत्बा अल अब्द खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी ख़तीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हज़रत मन्सूर शाह रहमतुल्लाह अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जि़ला फतेहपुर उत्तर प्रदेश

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