बीमार की नमाज़ का बयान!?


सवाल अगर बीमारी के सबब खड़े होकर नमाज़ नहीं पढ़ सकता है तो क्या करे

जवाब अगर खड़े होकर नमाज़ नहीं पढ़ सकता कि मर्ज़ बढ़ जायगा या देर में अच्छा होगा या चक्कर आता है या खड़े होकर पढ़ने से पेशाब का क़तरा आएगा या बहुत शदीद दर्द नाक़ाबिले बर्दाश्त हो जाएगा तो इन सब सूरतों में बैठ कर नमाज़ पढ़े📗 गुनियातुत्तालिबीन

सवाल अगर किसी चीज़ की टेक लगाकर खड़ा हो सकता है तो इस सूरत में क्या हुक्म है

जवाब अगर ख़ादिम या लाठी या दीवार वग़ैरह पर टेक लगाकर खड़ा हो सकता है तो फ़र्ज़ है के खड़ा हो कर पढ़े, इस सूरत में अगर बैठकर नमाज़ पढ़ेगा तो नहीं होगी 📚 बहारे शरीअत 📗 ग़ुनियातुत्तालिबीन

सवाल अगर कुछ देर खड़ा हो सकता है तो उसके लिए क्या हुक्म है

जवाब अगर कुछ देर भी खड़ा हो सकता है अगरचे इतना ही कि खड़ा हो कर अल्लाहू अकबर कहले तो फ़र्ज़ है कि खड़ा हो कर इतना कहे फिर बैठे वर्ना नमाज़ ना होगी 📚 बहारे शरीअत

सवाल बीमारी के सबब अगर रुकू सजदा भी ना कर सकता हो तो क्या करे

जवाब ऐसी सूरत में रुकू सजदा इशारे से करे मगर रुकू के इशारा से सजदा के इशारा में सर को ज़्यादा झुकाए 📚 दुर्रे मुख्तार 📚  बहारे शरीअत

सवाल अगर बैठकर भी नमाज़ ना पढ़ सकता हो तो क्या करे

जवाब ऐसी सूरत में लेटकर नमाज़ पढ़े इस तरह के चित लेटकर क़िब्ला की तरफ़ पांव करे मगर पांव ना फैलाए बल्के घुटने खड़े रखे और सर के नीचे तकिया वग़ैरह रखकर ज़रा ऊंचा करले और रुकू सजदा सर झुकाकर इशारा से करे ये सूरत अफ़ज़ल है और भी जाइज़ है के दाहिने या बांय करवट लेटकर मुंह क़िब्ला की तरफ़ करे📔 शरह वफ़ाया 📚 बहारे शरीअत

सवाल अगर सर से भी इशारा ना कर सके तो क्या करे

जवाब अगर सर से भी इशारा ना कर सके तो नमाज़ साक़ित हो जाती है फिर अगर नमाज़ के छः (6) वक़्त इसी हालत में गुज़र गए तो क़ज़ा भी साक़ित हो जाती है 📗 अनवारे शरीअत, उर्दू, सफ़ह 81/82)

कत्बा अल अब्द खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी ख़तीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हज़रत मन्सूर शाह रहमतुल्लाह अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जि़ला फतेहपुर उत्तर प्रदेश

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