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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा क्या है

तारीख़: रविवार, जुलाई 02, 2023


सवाल नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा क्या है

जवाब नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा ये है के ब वुज़ू क़िब्ला रू दोनों पाओं के पंजों में चार अंगुल का फ़ासला करके खड़ा हो और दोनों हाथ कान तक ले जाए के अंगूठे कान की लौ से छू जाएं इस हाल में के हथेलियां क़िब्ला रुख़ हों फिर नियत करके अल्लाहु अकबर कहता हुआ हाथ नीचे लाकर नाफ़ के नीचे बांध ले और सना (सुब्हाना कल्लाहुम्मा...पूरी) पढ़े फिर तअव्वुज़ यानी आऊज़ूबिल्लाही मिनश्शैतानिर्रजीम फिर तस्मियां यानी बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़कर अलहम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन.....पूरी पढ़े
 अलहम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन पूरी पढ़ने के बाद आमीन आहिस्ता कहे इसके बाद कोई सूरत या तीन (3) आयतें पढ़े या एक आयत जो के छोटी तीन आयतों के बराबर हो अब अल्लाहु अकबर कहता हुआ रुकू में जाए और घुटनों को हाथ से पकड़ले इस तरह के हथेलियां घुटनों पर हों उंगलियां ख़ूब फैली हों पीठ बिछी हो और सर पीठ के बराबर हो ऊंचा नीचा ना हो और कम से कम तीन (3) बार सुब्हाना रब्बि यल अज़ीम कहे फिर समीअल्लाहुलीमन हमीदह कहता हुआ सीधा खड़ा हो जाए और अकेले नमाज़ पढ़ता हो तो इसके बाद रब्बना लकल हम्द कहे फिर अल्लाहु अकबर कहता हुआ सजदा में जाए इस तरह के पहले घुटने ज़मीन पर रखे फिर हाथ फिर दोनों हाथों के बीच में नाक फिर पेशानी रखे इस तरह कि पेशानी और नाक की हड्डी ज़मीन पर जमाए और बाज़ुओं को करवटों और पेट को रानों और रानों को पिंडलियों से जुदा रखे और दोनों पाओं की सब उंगलियों के पेट क़िब्ला रू जमे हों और हथेलियां बिछी हों और उंगलियां क़िब्ला को हों और कम से कम तीन (3) बार सुब्हाना रब्बि यल आला कहे फिर सर उठाए फिर हाथ और दाहिना क़दम खड़ा करके उसकी उंगलियां क़िब्ला रुख़ करे और बायां क़दम बिछा कर उस पर ख़ूब सीधा बैठ जाए और हथेलियां बिछा कर रानों पर घुटनों के पास रखे फिर अल्लाहु अकबर कहता हुआ सजदा में जाए और पहले की तरह सजदा करके फिर सर उठाए फिर हाथ को घुटनों पर रखकर पंजों के बल खड़ा हो जाए अब सिर्फ बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़कर क़िराअत शुरू करे फिर पहले की तरह सजदा करके बायां क़दम बिछा कर बैठ जाए और तशह्हुद पढ़े
यानी अत्तहीयातू लिल्लाही वस्सलावातू (पूरी पढ़े
तश्ह्हुद पढ़ते हुए जब कलमा ए ला के क़रीब पहुंचे तो दाहिने हाथ की बीच की उंगली और अंगूठे का हल्क़ा बनाए और छंगुलिया और उसके पास वाली को हथेली से मिलादे और लफ़्ज़े ला पर कलिमा की उंगली उठाए मगर उसको हिलाए नहीं और कलिमा ए इल्ला पर गिरादे और सब उंगलियां फ़ौरन सीधी करले अब अगर दो से ज़्यादा रकअतें पढ़नी हैं तो उठ खड़ा हो और इसी तरह पढ़े मगर फ़र्ज़ों की रकअतों में अलहम्दू के साथ सूरत मिलाना ज़रूरी नहीं अब पिछला क़अदा जिसके बाद नमाज़ ख़त्म करेगा उसमें तश्ह्हुद यानी अत्तहीयात के बाद दुरूद शरीफ़ पढ़े 

अल्लाहुम्मा सल्ली अला सैय्यीदिना मुहम्मदिन व अला आली सैय्यीदिना मुहम्मदिन कमा सुल्लैता अला सैय्यीदिना इब्राहीमा व अला आली सैय्यीदिना इब्राहीमा इन्नका हमीदुम मजीद अल्लाहुम्मा बारिक अला सैय्यीदिना मुहम्मदिन व अला आली सैय्यीदिना मुहम्मदिन कमा बरकता अला सैय्यीदिना इब्राहीमा व अला आली सैय्यीदिना इब्राहीमा इन्नका हमीदुम मजीद
फिर दुआ ए मासूरह पढ़े मैसेज बड़ा होने की वजह से
दुआ नहीं लिखी है लिहाज़ा जिसको जो याद करना हो वो किताब 📗अनवारे शरीअत या किसी और किताब में देखकर याद करलें

या कोई और दूसरी दुआ ए मासूरह पढ़े, इसके बाद दाहिने मूंढे की तरफ़ मुंह करके अस्सलामू अलैकुम व रहमातुल्लाह कहे फिर बाएं तरफ़
अब नमाज़ पूरी हो गई सलाम फेर कर इमाम दाएं या बाएं मुंह करले इसलिए कि सलाम के बाद मुक़तदियों की तरफ़ मुंह करके बैठना मकरूह है फ़तावा रज़वियह शरीफ📗 अनवारे शरीअत, उर्दू, पेज 47/48/49/50)
कत्बा अल अब्द खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी ख़तीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हज़रत मन्सूर शाह रहमतुल्लाह अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जि़ला फतेहपुर उत्तर प्रदेश
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