नापाकी की ह़ालत में दुरूद शरीफ पढ़ सकते हैं या नहीं

 


सवाल

नापाकी की ह़ालत में दुरूद शरीफ पढ़ सकते हैं या नहीं,

जवाब

बिलकुल पढ़ सकते हैं, बेहतर है कि कुल्ली कर के पढ़ें, और ऐसे ही पढ़ लिया तो भी कोई हरज नहीं, फ़तावा आलमगीरी में है कि क़ुरआन मजीद के अलावा और दूसरे वज़ीफ़े कलिमा शरीफ, दुरूद शरीफ, वगैरह को पढ़ना जुनुब (यानी जिसने अपनी बीवी से हमबिस्तरी की हो और उसे ग़ुस्ल की जरूरत हो) के लिए बिला कराहत जाइज़ है, जैसे कि हैज़, M,C, व निफास वाली (बच्चा जनने के बाद जो ख़ून आता है उस) औरत के लिए क़ुरआन शरीफ के अलावा दूसरे तमाम अज़कार व वज़ाइफ को पढ़ना जाइज़ व दुरुस्त है

📚आलमगीरी जिल्द 1 सफह 36📗ख्वातीन की नमाज़ सफह 37

📗क़ानूने शरीयत जिल्द 1 सफह 28

✍🏻 अज़ क़लम 🌹 खाकसार ना चीज़ मोहम्मद शफीक़ रज़ा रिज़वी खतीब व इमाम (सुन्नी मस्जिद हज़रत मनसूर शाह रहमतुल्लाह अलैह बस स्टॉप किशनपुर अल हिंद)

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