अहम ऐलान
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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: अज़ान के वक्त बाते करना कैसा है

तारीख़: रविवार, फ़रवरी 20, 2022


आज़ान के वक़्त बातें करना कैसा है ?

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आज़ान के वक्त बातों में मशगूल रहना, एक आम बात हो गई है आवाम तो आवाम बाअज़ ख़वास अहले इल्म तक इसका ख्याल नहीं रखते जबकि हदीस शरीफ में है जो आज़ान के वक्त बातों में मशगूल रहे उस पर खात्मा बुरा होने का खौफ है

मसअला यह है कि जब आज़ान हो तो इतनी देर के लिए सलाम बातचीत और जवाब ए सलाम तमाम काम बंद कर दे यहां तक कि कुरआन ए मजीद की तिलावत में अगर अजान की आवाज आए तो तिलावत रोक दें और आज़ान गौर से सुने और जवाब दें रास्ता चलने में आज़ान की आवाज़ आई तो इतनी देर खड़ा हो जाए सुने और जवाब दे,, अगर चंद आज़ाने सुने तो सिर्फ पहली का जवाब देना सुन्नत है और सबका देना भी बेहतर है

📚 (बहारे शरीअत, हिस्सा 3, सफ़्हा 36)

📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न: 31)


✍🏻 अज़ क़लम 🌹 खाकसार ना चीज़ मोहम्मद शफीक़ रज़ा रिज़वी खतीब व इमाम (सुन्नी मस्जिद हज़रत मनसूर शाह रहमतुल्लाह अलैह बस स्टॉप किशनपुर अल हिंद)

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