ताज़िया बनाना और उसका देखना कैसा है ?

 ग्रुप रज़ा कमेटी सेमरबारी दुदही कुशीनगर

                         



सवाल 


उलमा ए किराम की बारगाह मे यह मसला पेशे खिदमत है की ताजिया बनाना और देखना कैसा है ?


साईल अब्दुल्लाह


जवाब 


मोरव्वाजा ताज़िया दारी नाजायज़ व हराम है कि इस में बहुत बातें ऐसी हैं जिनका शरीअत से कोई तअल्लुक़ नहीं मसलन ताज़िया का जुलूस आगे पीछे ढोल ताशे बाजे फिल्मी गीत औरतों का हुजूम और इसी तरह के और खोराफात जो आज कल के ताज़ियादारी में किए जाते हैं यह नाजायज़ व हराम है लोग इन बेहूदा बातों का एहतमाम करते हैं और जो लोग उसकी ताईद करते हैं सब गुनाहगार हैं


आला हजरत अलैहीमुर्रमां तहरीर फरमाते हैं कि ⤵️


ताज़िया की असल इस क़दर थी की रौज़ा ए इमामे हुसैन की सही नक़ल बनाकर ब नियत तबर्रुक मकान में रखना इसमें कोई खराबी ना थी जहां बे खुर्द ने इस असली जायज़ को नेस्तोनाबूद कर के सदाहा खुराफात तराशें के शरीअते मोतहरा से (अल अमां अल अमां) की सदाएं आने लगी औवल तो नक़्शे ताज़िया में रौज़ा ए मुबारक की नक़ल मलहुज़ ना रही हर जगह नई तराश कहीं इलाकाना निस्बत वगैरा फिर कुचा कुचा गली-गली अशाअत गम के लिए फिराना उनके गिर्द मातम ज़नी करना उससे मन्नते मांगना उसे कोई चीज़ चढ़ाना और रातों में ढोल बाजे के साथ तरह तरह के खेल करना वगैरा-वगैरा अब जबकि ताज़िया दारी उस तरीक़ा नामरज़िया का नाम है जो क़तअन बिदअत नाजायज़ व हराम है


📚 (फतावा ए फैज़ूर रसुल जिल्द 2 सफा 513)


ऐसे ही लहू लअब (खेल कुद) के बारे में कुरान मजीद में इरशाद है ⤵️


وذر الذین اتخذوا دینھم لعبا ولھوا وغرتھم الحیوۃ الدنیاپارہ ۷


और उन लोगों से दूर रहो जिन लोगों ने अपने दीन को खेल तमाशा बना लिया और उन्हें दुनिया की जिंदगी ने धोका दे दिया


और एक जगह है ⤵️


الذین اتخذوا دینھم لہوا ولعبا وغرتھم الحیوۃ الدنیا الخ


जिन लोगों ने दीन को खेल तमाशा बना लिया और दुनिया की जिंदगी ने उन्हें धोका में डाल दिया आज उन्हें हम छोड़ देंगे जैसा कि उन्होंने उस दिन मिलने का ख्याल छोड़ रखा था और जैसा वह हमारी आयतों से इनकार करते थे, पारा 8


इन आयात को ध्यान में रखकर देखें कि कैसे आज ताज़िया दारी और क़ौवाली वगैरा के नाम पर दीन को तमाशा बना दिया गया है और हदीस पाक में है


امرنی ربی عزوجل یمحق المعازف والمزامیر


📚مشکوۃ المصابیح کتاب الامارہ فصل ثالث صفحہ ۳۱۸


इसके अलावा एक और हदीस में है हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मेरी उम्मत में ऐसे लोग होंगे जो ढोल बाजे को हलाल कर लेंगे


📚 (बुखारी शरीफ जिल्द 2 सफा 837)


इस हदीस से भी इबरत हासिल कर सकते हैं कि आज हम क्या कर रहे हैं उलमा ए अहले सुन्नत की अक़वाल से भी ज़ाहिर है कि मोरव्वजा ताज़िया दारी नाजायज़ व हराम है


चुनांचे हज़रते मुहद्दीस दहलवी अलैहीर्रहमा फरमाते हैं कि ⤵️


تعزیئے داری در عشرہ محرم وساختن ضرائح وصورت درست نیست


यानी अशरा मोहर्रम में जो ताज़िया दारी होती है वह हराम है


📚 (फतावा ए अज़िज़िया जिल्द 1 सफा 75)


आला हज़रत अलैहिर्रहमा व रिज़वान तहरीर फरमाते हैं की इस ताज़िया दारी उस तरीक़ा नामर्ज़िया का नाम है जो क़तअन बिदअत व नाजायज़ व हराम है


📚 (फतावा रज़विया जिल्द 24 सफा 513 मतबुआ रजा फाउंडेशन लाहौर)


कुछ लोग कहते हैं बनाना जायज़ है घुमाना ना जायज़ आला हज़रत ने इसका भी रद्द फरमाया और लिखते हैं मगर इस नक़ल में भी अहले बिदअत से एक मुशाबहत और ताज़िया दारी की तोहमत का खदशा और आइंदा अपनी औलाद व अहले एतिक़ाद के लिए इब्तिला ए बिदअत का अंदेशा है लिहज़ा रौज़े सैयदुश्शुहदा कि ऐसी तस्वीर भी ना बनाई जाए


📚 (फतावा रज़विया जिल्द 24 सफा 513)


हुजूर मुफ्ती ए आज़म हिंद फरमाते हैं कि ⤵️


मोरव्वजा ताज़िया दारी शरअन नजायज़ व हराम है


📚 (फतावा मुस्तफावीया सफा 534 मतबुआ रजा अकैडमी मुंबई)


और जितने उलमा ए किराम है तमाम के नज़दीक यह ना जायज़ व हराम है मसलन हुजूर सदरूश्शरिया मौलाना हशमत अली खान अलैहिर्रहमा व रिज़वान वगैरा


लिहाजा मुसलमानों को इस सब से परहेज़ करना लाज़िम व ज़रूरी है और एक बात कुछ नाम नेहाद मौलवी पहले भी थे और आज भी कुछ खानकाहें और मौलवी मौजूद हैं जो अपना नाम चमकाने के लिए और पेट भरने के लिए उसे जायज़ कह रहे हैं मुसलमानों को ऐसे लोगों से भी परहेज़ करना चाहिए


واللہ تعالی اعلم بالصواب


✍🏼 अज़ क़लम हज़रत अल्लामा व मौलाना मोहम्मद मज़हर अली रज़वी साहब किबला



✍🏻 हिंदी ट्रांसलेट मोहम्मद रिज़वानुल क़ादरी सेमरबारी (दुदही कुशीनगर उत्तर प्रदेश)

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