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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ाने के लिए इजाज़त लेना ज़रूरी है क्या ?

तारीख़: शनिवार, जनवरी 31, 2026

 

सवाल

क्या फ़रमाते हैं उलेमा-ए-किराम और मुफ़्तीआने इज़ाम इस मसले के बारे में कि नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ाने के लिए इजाज़त लेना ज़रूरी है या नहीं?

बराए मेहरबानी मुकम्मल तौर पर जवाब इनायत फ़रमाएँ, बड़ी मेहरबानी होगी।

साइल: मोहम्मद रोज़म रज़ा

जवाब

जी हाँ, वली की इजाज़त लेना ज़रूरी है

जैसा कि इमाम-ए-अहले सुन्नत, शाह इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िले बरेलवी अलैहिर्रहमा तहरीर फ़रमाते हैं:

नमाज़-ए-जनाज़ा वली-ए-मय्यत का हक़ है।दूसरा (कोई भी व्यक्ति) उसके इज़्न का मुहताज है। अगर वली की इजाज़त के बिना किसी ने जनाज़ा पढ़ा दिया, तो वली को दोबारा पढ़ाने की इजाज़त है,हालाँकि नमाज़-ए-जनाज़ा की तक़रार (दोबारा पढ़ना) मंजूर नहीं।

हवाला:फ़तावा रज़विया शरीफ़, जिल्द 09, सफ़ा 176,मुतबुआ — रज़ा फ़ाउंडेशन लाहौर

वल्लाहु व रसूलुहू आ’लम बिस्सवाब

कत्बा ब्द-ए-ख़ाकसार नाचीज़ मुहम्मद शफीक़ रज़ा रज़वी ख़तीब व इमाम — सुन्नी मस्जिद हज़रत मंसूर शाह रहमतुल्लाह अलैहि बस-स्टॉप, किशनपुर 

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