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सवाल: क्या काफिर की ताज़ीम मुत़लकन हराम है ?

तारीख़: शनिवार, नवंबर 29, 2025



क्या काफिर की ताज़ीम मुत़लकन हराम है ?

(मसला) क्या काफ़िर की ताज़ीम (सम्मान) और तारीफ़ करना बिल्कुल ही कुफ़्र है? क्या किसी हिन्दू सामाजिक नेता की "जय" कहना शिर्क होगा?

(जवाब)

नहीं काफ़िर की ताज़ीम बिल्कुल ही कुफ़्र नहीं है। यह सिर्फ उसी समय कुफ़्र होगी जब यह ताज़ीम उसके किसी कुफ़्रिय अमल या कुफ़्रिय अक़ीदे से संबंधित हो

आलिमा हमवी ने ग़म्ज़ यू़नुल बसाइर में लिखा है

अगर किसी ने ज़िम्मी (ग़ैर मुस्लिम नागरिक) को ताज़ीम (सम्मान) के तौर पर सलाम किया तो वह काफ़िर हो गया — कुछ फज़ला ने कहा कि इसकी शर्त यह है कि वह ताज़ीम उसके कुफ़्र की नीयत से है

वरना यह भी संभव है कि वह मुसलमानों पर उसके एहसान या किसी बड़े व्यक्ति की ताज़ीम की वजह से हो

इन्तेबाह

लोगों का भीमराव अंबेडकर को ख़ुदा समझना यह हमारे नज़दीक साबित नहीं है इसलिए हम उनके जय भीम कहने को उनकी सामाजिक सुधार की तारीफ़ मानते हैं, लिहाज़ा यह कुफ़्र नहीं है

हाँ! हम इससे सख़्त मना करते हैं क्योंकि यह हिंदुओं का ऐसा नारा है जिसे धार्मिक समझा जा सकता है

वल्लाहो आलमु बिस्सवाब 

कत्बा: नदीम बिन अलीम अल-मसबूर अल-ऐनी

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