अहम ऐलान
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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: याद ए हुसैन में आंशू निकल आए तो क्या हुक्म है

तारीख़: शुक्रवार, अगस्त 25, 2023

 


सवाल  मैदाने करबला में हज़रत इमाम हुसैन रदियल्लाहु तआला अन्हु और उन के रुफका पर जुल्म व सितम किए गए उन्हें पढ़ कर या सुन कर दिल गमगीन हो जाए आंखों से आंसू छलक परें तो क्या यह भी मना है ?

जवाब आला हजरत रदियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं जी नहीं जैसा कि सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं अरे सुनते नहीं हो बेशक अल्लाह न ऑसुओं से रोने पर अज़ाब करे न किलके गम पर (ज़बान की तरफ से इशारा करके फरमाया) हां उस पर अजाब है या रहम फरमाए। इस को बुखारी व मुस्लिम ने हजरत अब्दुल्लाह इल्ने उमर रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है

📕 (सही बुखारी किताबुल जनाइज वाबुल यका इन्दल मरीज़ जिल्द 1 सफा 174)

📕 इसी तरह फतावा आलमगीरी में भी है जामिउल मुजमिरात से (बुलन्द आवाज़ से रोना) और करना बीन करना (इस्लाम में) जायज नहीं लेकिन बिगैर आवाज़ के रोना और बहाना ममनूअ (मना) नही

आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खान रदियल्लाहु अन्हु इरशाद फरमाते हैं कौन सा सुन्नी होगा जिसे वाकिए करबला का गम नही। या उस की याद से दिल महजून (मलाल) और आंखे पुरनम नहीं हां मसाइब में हम को सब्र का हुक्म फरमाया है जजअ फजअ (रोना पीटना सर पटकना चिल्लाने) को शरीअत मना फरमाती है। और जिसे वाकई दिल में गम न हो उसे झूठा इजहारे गम (गम) रिया (दिखावा) है और कसदन (जान बूझ कर) गम आवरी और और गम परवरी खिलाफे रज़ा है। जिसे उस का गम न हो। उसे ये गम न रहना चाहिए बल्कि उसे गम न होने का गम होना चाहिए कि उस की मुहब्बत नाकिस है और जिस की महब्बत नाकिस हो उस का ईमान नाकिस है वल्लाहु तआला अअलमु बिस्सवाब

📕 (फतावा रजविया शरीफ जिल्द 24 सफा 487-488)

कत्बा अल अब्द खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी ख़तीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हज़रत मन्सूर शाह रहमतुल्लाह अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जि़ला फतेहपुर उत्तर प्रदेश

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