💍मर्दों का एक से ज्यादा अंगूठी पहनना❓


💍मर्दों का एक से ज्यादा अंगूठी पहनना❓

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इस्लामी नुकतए नजर से मर्द को चांदी की सिफ एक अंगूठी एक नग की पहनना जाइज है जिसका वजन साढे चार माशे ( 4.357 ग्राम) से कम हो इसके अलावा मर्द के लिए कोई जेवर हलाल नहीं एक से ज्यादा अंगूठी या कोई जेवर किसी भी धात का हो सब गुनाह व नाजाइज है

मगर आज कल अवाम तो अवाम बाज़ जाहिल नाम निहाद सूफ़ियों और मुखालिफे इस्लाम पीरों ने ज्यादा से ज्यादा अंगूठी पहनने को अपने ख्याल में फकीरी व तसव्वुफ समझ रखा है यह एक चांदी की शरई अंगूठी से ज्यादा अंगूठिया पहनने वाले ख्वाह वह सोने की हों या चांदी की या और किसी धात की सब के सब गुनाहगार हैं और इस लाइक नहीं कि उन्हें पीर बनाया जाए । हमारे कुछ भाई तांबे पीतल और लोहे के छल्ले पहनते हैं और उन्हें दर्द और बीमारी की शिफा ख्याल करते हैं यह भी गलत है । और इलाज के तौर पर भी नाजाइज़ जेवरात छल्ले वगैरा पहनना जाइज़ नहीं है 

📚 (फतावा रज़विया जिल्द १० निस्फे अव्वल सफहा १४)

कुछ लोग यह कहते हैं कि यह छल्ला या अंगूठी हम मक्का मदीना या अजमेर से लाए हैं अगर वह खिलाफे शरम है तो मक्के मदीने अजमेर के बाज़ार में बिकने से हलाल नहीं हो जाएगी

भाईयो आप तो आज वहाँ के बाजारों से लाए हैं और यह नाजाइज होने का हुक्म 1400 चौदह सौ साल कब्ल(पहले) वहीं से आ चुका है । खुलासा यह कि मुकद्दस शहरों में बिकने से हराम चीज़ हलाल नहीं हो जाती 

भाईयो अल्लाह तआला से डरो और नाजाइज अंगूठियां जेवरात कडे छल्ले पहन कर अल्लाह की नाफरमानी न करो

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.132/133)

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✍🏻 अज़ क़लम 🌹 खाकसार ना चीज़ मोहम्मद शफीक़ रज़ा रिज़वी खतीब व इमाम (सुन्नी मस्जिद हज़रत मनसूर शाह रहमतुल्लाह अलैह बस स्टॉप किशनपुर अल हिंद)

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