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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: हैज व निफास वाली औरतो को मनहूस समझना कैसा है

तारीख़: शनिवार, जनवरी 22, 2022
हैज व निफास वाली औरतो को मनहूस समझना कैसा है


ज़च्चागी और महावारी मे औरतो के साथ खाने पीने और उनका झूटा खाने मे हरज नही। हिन्दुस्तान मे जो बाज़ जगह उनके बरतन अलग कर दिये जाते है। उनके साथ खाने पीने को बुरा जाना जाता है या उनके बरतनो को नापाक ख्याल किया जाता है। यह हिन्दुओं की रस्मे है ऐसी बेहूदा रस्मो से इहतेयात लााज़िमी है। अल बत्ता इस हालत मे मर्द का अपनी बीबी से हम बिस्तरी करना हराम है जिससे बचना हमे बहुत जरूरी है।

(गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह नः 25) 



✍🏻हिन्दी ट्रांसलेट 👉🏻 खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रज़ा रिज़वी खतीब व इमाम (सुन्नी मस्जिद हज़रत मनसूर शाह रहमतुल्लाह अलैह बस स्टॉप किशनपुर अल हिंद)
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