इमामत के लिए कौन ज़्यादा हक़दार है?
सवाल: क्या फ़रमाते हैं उलमा-ए-किराम इस मसअले के बारे में कि अगर किसी मस्जिद में इमाम मौजूद न हों और कई लोग नमाज़ के लिए जमा हों, तो उनमें से किस शख्स को इमाम बनाया जाए? क्या हर शख्स इमामत कर सकता है या इमामत के लिए कुछ ख़ास शर्तें भी हैं?
जवाब: इमामत एक अहम ज़िम्मेदारी है, इसलिए हर शख्स को इमाम बना देना मुनासिब नहीं। इमाम के लिए ज़रूरी है कि वह नमाज़ के मसाइल से वाक़िफ़ हो और क़ुरआन-ए-करीम सही तौर पर पढ़ने वाला हो
अगर कई शख्स इमामत के लायक़ हों तो उनमें जो इल्म और क़िराअत के एतिबार से ज़्यादा फ़ज़ीलत रखता हो, उसे इमाम बनाया जाए। सिर्फ़ ज़्यादा उम्र का होना इमामत के लिए काफ़ी नहीं, बल्कि नमाज़ के मसाइल का इल्म और सही क़िराअत भी देखी जाएगी
और अगर किसी मस्जिद का मुक़र्रर इमाम मौजूद हो तो उसकी मौजूदगी में किसी दूसरे शख्स को उसकी इजाज़त के बग़ैर इमाम बनाना मुनासिब नहीं
लिहाज़ा इमामत के लिए ऐसे शख्स को आगे किया जाए जो नमाज़ के मसाइल जानता हो, क़िराअत सही करता हो और इमामत की ज़िम्मेदारी अदा करने के क़ाबिल हो।
वल्लाहो आलमु बिस्सवाब
कत्बा नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी खतीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हजरत मन्सूर शाह रहमातुल्ला अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जिला फतेहपुर
