अहम ऐलान
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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: शक़ की बिना पर दुबारा वज़ू करना कैसा

तारीख़: शुक्रवार, मार्च 10, 2023

सवाल मैंने असर की नमाज़ पढ़ी और फिर मगरिब की नमाज़ पढ़ते वक़्त शक हुआ के मेरा वुज़ू बाकी है या नहीं तो अब मैं नमाज़े मगरिब के लिए वुज़ू करुं या उसी वुज़ू से नमाज़ पढ़ूं तो क्या नमाज़ हो जायेगी और मुझे अक्सर वुज़ू के बाद शक होता रहता है के मेरा वुज़ू है या नहीं इसके बारे में कुछ बतायें मैं क्या करुं

जवाब सिर्फ शक से वुज़ू नहीं टूटता यक़ीनन आप उस वक़्त तक बा वुज़ू हैं जब तक वुज़ू टूटने का ऐसा यक़ीन न हो जाए के क़सम खा सकें- बहारे शरीयत में है के अगर दौराने वुज़ू किसी अज़ू के धोने में शक वाके हो और ये ज़िंदगी का पहला वाकिया है तो इसको धो लें और अगर अक्सर शक पड़ा करता है तो उसकी तरफ तवज्जो न दें इसी तरह वुज़ू के बाद भी शक पड़े तो इस का कुछ ख्याल न लें, इसी तरह आप बा वुज़ू थे , अब शक आने लगा के पता नहीं वुज़ू है या नहीं, ऐसी सूरत में आप बा वुज़ू हैं क्योंकि सिर्फ शक से वुज़ू नहीं टूटता

📚 बहारे शरीयत जिल्द 1 सफह 310 📚 दुर्रे मुख्तार जिल्द 1 सफह 310

कत्बा अल अब्द खाकसार नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी ख़तीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हज़रत मन्सूर शाह रहमतुल्लाह अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जि़ला फतेहपुर उत्तर प्रदेश

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