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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: देवबंदी के हाथ का ज़बीहा का हुकुम

तारीख़: रविवार, जनवरी 09, 2022

 ग्रुप रज़ा कमेटी सेमरबारी दुदही कुशीनगर

                         



सवाल


हज़रत पूछना यह था कि क्या देवबंदी के हाथ का ज़बीहा जायज़ है हवाले के साथ जवाब इनायत फरमाएं


साईल मोहम्मद इमामुद्दीन निज़ामी (गोरखपुर)


जवाब


इमाम ए अहले सुन्नत हुजूर सैयदी सरकार ए आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान रज़ि अल्लाहु तआला अन्हु लिखते हैं ⤵️


गैर मुक़ल्लदिया पर बेवजह कसीरा इल्ज़ाम कुफ्र है उन में जो मुनकर ज़रूरीयाते दीन है वह तो बिल इजम्मा काफिर ही हैं वरना वो फूक़्हा ए किराम उन पर हुक्म कुफ्र फरमाते हैं और ज़बीहा का हलाल होना ना होना हुक्म फिकही है खुसूसन वही एहतियात की मानअ तकफिर हो यहां उनके जबिहा के खाने से मना करती है की जमहुर फुक़्हा ए किराम के तौर पर हराम व मुर्दार का खाना होगा दूसरे मक़ाम पर फरमाते हैं की देवबंदी का ज़बिहा मुर्दार है


📚 (फतावा रज़विया जिल्द 20 सफा 249)


✍🏼 अज़ क़लम हज़रत मौलाना मोहम्मद मासूम रज़ा नूरी साहब क़िबला (मंगलोर कर्नाटक इंडिया)


✍🏻 हिंदी ट्रांसलेट मोहम्मद रिज़वानुल क़ादरी सेमरबारी (दुदही कुशीनगर उत्तर प्रदेश)

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