अहम ऐलान
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ISLAMI MALUMAT

मरकज़-ए-तहक़ीक़ व इफ़्ता
शरई फ़तवा दस्तावेज़

सवाल: क्या रूह किसी दूसरे इंसान के जिस्म में जा सकती है.?

तारीख़: रविवार, फ़रवरी 09, 2025

सवाल:- क्या इंसान की रूह किसी दूसरे इंसान के जिस्म में जा सकती है.?

जवाब रूह का दूसरे के बदन में आने को आवा गवन कहते है जो कि शरीयत में मुहाले शरई है ऐसा अकीदा शरीयत के खिलाफ है और मुमकिन है कि ऐसा शख्स ऐसी बातें जिहालत की वजह से कहता है ऐसा शख्स गुमराह है।

जैसा कि मुफ्ती अमजद अली आज़मी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है कि ये ख्याल की वोह रूह किसी दूसरे के बदन में चली आती है ख्वाह वोह आदमी का बदन हो या किसी जानवर का जिसको तनासुख और आवा गवन कहते है महज़ बातिल और इसका मानना कुफ्र है!

[📗हवाला:- मसाइले शरीयत पेज 59 ]

वल्लाहो आलमु बिस्सवाब

कत्बा नाचीज़ मोहम्मद शफीक़ रजा़ रज़वी खतीब व इमाम सुन्नी मस्जिद हजरत मन्सूर शाह रहमातुल्ला अलैहि बस स्टैंड किशनपुर जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेश

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